देहरादून: 16 सितंबर 2025 की वो काली रात, जब सहस्त्रधारा और कार्लीगाड़ क्षेत्र में बादल फटने से मची तबाही ने दर्जनों परिवारों का आशियाना छीन लिया था, आज एक बार फिर सुर्खियों में है। आपदा के जख्म अभी भरे नहीं हैं, लेकिन पुनर्निर्माण और विस्थापन की उम्मीदें फिर से जाग गई हैं।

आज आपदा प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेने के लिए उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान और क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य वीर सिंह चौहान ‘ग्राउंड जीरो’ पर पहुंचे।

डीएम ने बच्चों से जाना हाल
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी आशीष चौहान का एक मानवीय चेहरा देखने को मिला। उन्होंने न केवल प्रभावित परिवारों से उनकी समस्याएं सुनीं, बल्कि आपदा की मार झेल रहे बच्चों के पास जाकर उनसे उनकी शिक्षा और पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। एक प्रशासनिक अधिकारी का यह आत्मीय भाव प्रभावित परिवारों के लिए संबल का काम कर रहा है।

बारिश से पहले ‘सेफ ज़ोन’ में विस्थापन अनिवार्य
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने मौके पर चल रहे राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट और कड़े शब्दों में अधिकारियों को निर्देशित किया कि आगामी मानसून और बारिश के दौर के शुरू होने से पहले हर हाल में प्रभावित परिवारों का सुरक्षित स्थानों पर विस्थापन सुनिश्चित किया जाए। मंत्री ने कहा कि आपदा के बाद अब प्रभावितों को और अधिक जोखिम में नहीं डाला जा सकता।

पुनर्निर्माण पर जिला पंचायत सदस्य की नज़र
मौके पर मौजूद जिला पंचायत सदस्य वीर सिंह चौहान ने स्थानीय निवासियों की परेशानियों को प्रशासन के सामने प्रमुखता से रखा। उन्होंने आपदा से क्षतिग्रस्त हुए बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग की, ताकि लोग जल्द से जल्द सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।

क्या प्रशासन के दावे हकीकत में बदलेंगे?
प्रशासनिक अमले का यह दौरा एक सकारात्मक संकेत है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या मानसून की पहली फुहारों से पहले, आपदा पीड़ित परिवारों को सुरक्षित छत मिल पाएगी? क्या यह दौरा सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा, या इस बार पीड़ित वास्तव में सुरक्षित महसूस करेंगे?

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By Mansa Ram Uniyal

"Mansa Ram Uniyal is an experienced digital journalist and the founder of Mansa 24 News. His mission is to deliver unbiased reporting from every corner of the nation through the power of modern technology and high-impact storytelling."

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