‘नेपाली फार्म-देहरादून फोरलेन पहले से मौजूद, तो दूसरा हाईवे क्यों?’— सात मोड़ पर पेड़ों की कटाई के खिलाफ प्रेस क्लब में गरजे पर्यावरणविद और स्थानीय लोग! 📍 देहरादूनऋषिकेश के सात मोड़ क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर अंधाधुंध पेड़ कटान को लेकर पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा है। देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने सरकार के विकास मॉडल पर तीखे सवाल उठाए और चेतावनी दी कि हाथियों के इस प्राकृतिक गलियारे (ਕੌridor) को उजाड़ने से मानव-वन्यजीव संघर्ष खतरनाक स्तर पर पहुंच जाएगा। पिछले दो-तीन हफ्तों से सात मोड़ पर लगातार डटे इन लोगों ने आगामी एक महीने के आंदोलन का पूरा खाका भी पेश कर दिया है। प्रेस वार्ता में उठाए गए मुख्य मुद्दे और बड़े सवाल: दूसरा हाईवे क्यों?: पर्यावरणविदों ने NHAI की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब नेपाली फार्म से देहरादून जाने वाला फोरलेन हाईवे पहले से ही शानदार स्थिति में मौजूद है, तो ठीक उसके समानांतर दूसरा एनएच-7 हाईवे किस फायदे के लिए बनाया जा रहा है? यह सरकारी धन और पर्यावरण की खुली बर्बादी है। 25 सालों में देहरादून का 47% जंगल साफ: आरटीआई आंकड़ों का हवाला देते हुए वक्ताओं ने बताया कि राज्य निर्माण के पिछले 25 वर्षों में उत्तराखंड के कुल जंगल कटान का 47 प्रतिशत हिस्सा अकेले देहरादून जिले में हुआ है। यदि यही हाल रहा तो दून घाटी जल्द ही सिर्फ एक कंक्रीट का जंगल बनकर रह जाएगी। हाथियों का मुख्य हैबिटेट खतरे में: वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि सात मोड़ क्षेत्र हाथियों का बेहद प्रसिद्ध और प्रमुख गलियारा है। यहां निर्माण कार्य शुरू होने से अगले 4-5 वर्षों तक पैदा होने वाली अशांति हाथियों को बस्तियों की ओर धकेल देगी, जिससे डोईवाला जैसी घटनाएं और बढ़ेंगी। व्या व्यावहारिक समाधान: पर्यावरण प्रेमियों ने मांग की कि आज से 50 साल पुरानी व्यवस्था की तरह इस मार्ग को रात 8:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक यातायात के लिए पूरी तरह बंद किया जाए और सारा ट्रैफिक नेपाली फार्म-देहरादून रूट पर डायवर्ट किया जाए। दुर्घटनाएं कम होने के दावे झूठे: सरकार के उस तर्क को भी खारिज किया गया जिसमें सड़क सीधी करने से हादसे रुकने की बात कही जा रही है। वक्ताओं ने कहा कि चौड़े हाईवे और एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार बढ़ने से दुर्घटनाएं घटती नहीं बल्कि और बढ़ती हैं। आंदोलन की आगामी रूपरेखा: प्रशासन के खिलाफ इस संघर्ष को तेज करने के लिए युवाओं और पर्यावरणविदों ने आगामी कार्यक्रमों का ऐलान किया है: 15 अगस्त: सात मोड़ पर विशेष जागरूकता एवं देशभक्ति कार्यक्रम व बाइक रैली का आयोजन। रक्षाबंधन: पेड़ों को बचाने का संकल्प लेते हुए जंगलों में पेड़ों को रक्षासूत्र बांधने का अनोखा कार्यक्रम। 9 सितंबर (हिमालय दिवस): “यह कैसा हिमालय दिवस?” शीर्षक से एक वृहद कार्यक्रम आयोजित कर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए जाएंगे। नियमित प्रदर्शन: प्रत्येक रविवार को सात मोड़ पर पेड़ कटान के विरोध में प्रदर्शन और जागरूकता अभियान जारी रहेगा। वक्ताओं ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि पर्यावरण और वन्यजीवों की बलि देकर किए जा रहे इस सड़क चौड़ीकरण के फैसले को तुरंत वापस लिया जाए, अन्यथा आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। Post navigation UP-STF के चार जांबाज अधिकारियों और कर्मियों को इस स्वतंत्रता दिवस पर मिलेगा ‘वीरता मेडल’! 12 साल में देश की आर्थिक और औद्योगिक छलांग: डिफेंस प्रोडक्शन 4 गुना, खादी 5 गुना और इलेक्ट्रिक मैन्युफैक्चरिंग 7 गुना बढ़ी—पीएम मोदी