पटना: बिहार की राजनीति में आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। दशकों के इंतज़ार और कई राजनैतिक समीकरणों के बाद, भारतीय जनता पार्टी ने बिहार की कमान सीधे तौर पर अपने सबसे भरोसेमंद और आक्रामक चेहरे सम्राट चौधरी को सौंपने का निर्णय लिया है। पटना में आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से सम्राट चौधरी को नेता चुन लिया गया है। बैठक में हुआ बड़ा फैसला पटना स्थित प्रदेश कार्यालय में हुई विधायक दल की अहम बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में सभी विधायकों ने एक सुर में सम्राट चौधरी के नाम का समर्थन किया। पार्टी के इस फैसले के साथ ही यह साफ हो गया है कि भाजपा अब बिहार में अपने दम पर राजनीति की दिशा तय करने की तैयारी में है। 75 साल का रिकॉर्ड और ऐतिहासिक महत्व राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आजादी के बाद यह पहला मौका है जब भाजपा ने बिहार में इतनी मजबूती से अपने किसी नेता को नेतृत्व के लिए आगे किया है। सम्राट चौधरी का चयन केवल एक पद का चुनाव नहीं है, बल्कि यह बिहार के आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा का एक बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ माना जा रहा है। क्यों अहम हैं सम्राट चौधरी? विपक्ष में खलबली 🔹प्रखर वक्ता: सम्राट चौधरी अपनी बेबाक और आक्रामक बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। “पटना में भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद सम्राट चौधरी 🔹जातीय समीकरण: कुशवाहा समाज से आने वाले सम्राट चौधरी के जरिए भाजपा ने बिहार के एक बड़े वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। 🔹संगठन पर पकड़: प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उनके कार्यकाल में कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा देखी गई है। भाजपा के इस फैसले के बाद विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि बिहार में अब ‘नीतीश बनाम सम्राट’ या ‘तेजस्वी बनाम सम्राट’ की जंग और भी दिलचस्प होगी। “बिहार की राजनीति से जुड़ी हर बड़ी खबर सबसे पहले पाने के लिए Mansa 24 News के सोशल मीडिया पेजों को फॉलो करें।” Post navigation 🔴 BREAKING: देवभूमि को PM मोदी की सौगात: डाट काली मंदिर में टेका मत्था, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का किया उद्घाटन!