नई दिल्ली/वाशिंगटन/सियोल:

वैश्विक कूटनीति से इस समय एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान के साथ चल रहे लंबे संघर्ष और सैन्य उलझनों के बीच अमेरिका ने अपने रणनीतिक फोकस को एशिया से हटाना शुरू कर दिया है। इसे लेकर अमेरिका के अहम सहयोगी देश दक्षिण कोरिया ने पहले ही कड़ी चेतावनी दी थी कि पश्चिम एशिया की लड़ाई को संभालने के लिए प्रशांत क्षेत्र (Pacific) में अपनी ताकत कम न की जाए, वरना इसका सीधा फायदा उत्तर कोरिया (North Korea) उठा सकता है।

आइए जानते हैं इस पूरी भू-राजनीतिक हलचल के 5 बड़े बिंदु:


खाड़ी की तरफ बढ़ा अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर: पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में तैनात अमेरिकी नौसेना का आखिरी एयरक्राफ्ट कैरियर भी अब सीधे फारस की खाड़ी (Gulf) की तरफ कूच कर चुका है, जिससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी काफी कम हो गई है।
ज्वाइंट मिलिट्री एक्सरसाइज में कटौती: अमेरिकी प्रशासन ने दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले बड़े संयुक्त सैन्य अभ्यासों (Joint Exercises) के दायरे को भी सीमित करना शुरू कर दिया है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
सुरक्षा और भरोसे का संकट: जो सहयोगी देश अमेरिका से लगातार मजबूत और स्थिर रक्षा deterrent (निवारक सुरक्षा) की उम्मीद कर रहा था, वह अब अमेरिकी सैन्यFootprint को सिकुड़ते हुए देख रहा है। अमेरिका का पूरा ध्यान और संसाधन इस समय ईरान संघर्ष में उलझे हुए हैं।
संसाधनों की भारी कमी: जानकारों का मानना है कि जब कोई देश एक साथ कई मोर्चों पर दुश्मनों को घेरने की कोशिश करता है, तो सीमित संसाधनों के चलते कहीं न कहीं समझौता करना ही पड़ता है। फिलहाल, इस कूटनीतिक रस्साकशी में एशिया को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उत्तर कोरिया को मिल सकता है मौका: विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अमेरिकी ध्यान बंटने का सीधा फायदा उठाकर प्योंगयांग (उत्तर कोरिया) अपनी गतिविधियों को तेज कर सकता है, जिससे कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव नए चरम पर पहुंच सकता है।

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By Mansa Ram Uniyal

"Mansa Ram Uniyal is an experienced digital journalist and the founder of Mansa 24 News. His mission is to deliver unbiased reporting from every corner of the nation through the power of modern technology and high-impact storytelling."

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