नई दिल्ली: केंद्र सरकार को आज संसद में उस समय बड़ी हार का सामना करना पड़ा, जब लोकसभा में 131वाँ संविधान संशोधन बिल बहुमत की कमी के चलते गिर गया। सदन में हुए मतदान में बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 230 सांसदों ने मतदान किया। क्यों गिरा बिल?संविधान संशोधन के लिए संसद के किसी भी सदन में दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता होती है। आज के मतदान के अनुसार, बिल को पास होने के लिए कम से कम 352 वोटों की जरूरत थी, लेकिन सरकार केवल 298 का आंकड़ा ही छू पाई। शून्य अनुपस्थिति के साथ 528 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा लिया था। क्या था इस बिल में?यह बिल मुख्य रूप से परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण के क्रियान्वयन से जुड़ा था। सरकार चाहती थी कि 2027 की जनगणना का इंतजार किए बिना ही सीटों का बंटवारा (Delimitation) किया जाए और 2029 के चुनावों में महिला आरक्षण (33%) लागू कर दिया जाए। विपक्ष ने इसका यह कहकर विरोध किया कि यह दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटों को कम करने और चुनावी नक्शे को बदलने की साजिश है। पुराना कानून प्रभावी: 2023 में पास हुआ ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (106वाँ संशोधन) 16 अप्रैल 2026 से पहले ही लागू किया जा चुका है। देरी की आशंका: आज का बिल गिरने का मतलब है कि अब महिला आरक्षण तभी लागू हो पाएगा जब नई जनगणना के बाद परिसीमन होगा। यानी 2029 के चुनावों में इसे लागू करने की सरकार की ‘फास्ट-ट्रैक’ योजना अब खटाई में पड़ती दिख रही है। Post navigation गोवा के अश्वेम बीच पर भीषण अग्निकांड: रिजॉर्ट में लगी भयंकर आग, सैलानियों में मची चीख-पुकार, देखें तबाही का मंजर! BIG BREAKING: ‘विपक्ष के लिए दलहित देशहित से बड़ा है’, बिल गिरने पर मेज थपथपाने वालों पर बरसे पीएम मोदी; राष्ट्र के नाम संबोधन की बड़ी बातें