नई दिल्ली/वाशिंगटन/बर्लिन/टोक्यो: दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। वैश्विक स्तर पर ‘सस्ते पैसे’ (Cheap Money) का दौर अब लगभग पूरी तरह खत्म होता नजर आ रहा है। अमेरिका, जर्मनी और जापान जैसे दुनिया के दिग्गज देशों में उधारी की लागत (Borrowing Costs) पिछले कई दशकों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। इस आर्थिक उथल-पुथल के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। आइए जानते हैं इस आर्थिक संकट के 5 बड़े कारण:सरकारी कर्ज का भारी बोझ: दुनिया भर की सरकारें इस समय भारी-भरकम कर्ज के बोझ तले दबी हुई हैं। अकेले अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज अब 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गया है, जिससे वित्तीय व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।महंगा होता कर्ज (ब्याज दरें): अमेरिका में 10 साल की उधारी दरें (10-year borrowing rate) खतरनाक रूप से 5% के करीब पहुंचती जा रही हैं, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकेत है।ईरान युद्ध और तेल की कीमतें: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार उच्च बनी हुई हैं, जिससे महंगाई का संकट और गहरा गया है।AI बूम के लिए भारी-भरकम कर्ज: टेक सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की आंधी चल रही है। दुनिया की बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां AI के इस बूम को फंड करने के लिए भारी मात्रा में कर्ज ले रही हैं, जिससे ग्लोबल लिक्विडिटी पर असर पड़ रहा है।आम जनता की जेब पर सीधा असर: यह संकट सिर्फ वॉल स्ट्रीट या शेयर बाजार तक सीमित नहीं है। जब सरकारों को कर्ज चुकाने के लिए ज्यादा ब्याज देना पड़ता है, तो उसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ता है और होम लोन, ऑटो लोन तथा बिजनेस लोन महंगे हो जाते हैं।आर्थिक जानकारों का मानना है कि जब सरकारें वित्तीय दबाव महसूस करती हैं, तो उसका असर आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी बहुत जल्द दिखने लगता है। Post navigation बड़ी खबर: यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट; मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान के यामानाशी प्रान्त के गवर्नर को किया स्वागत मध्य पूर्व की जंग में उलझा अमेरिका, क्या एशिया पर मंडरा रहा बड़ा खतरा? दक्षिण कोरिया की चेतावनी नजरअंदाज