देहरादून में खौफनाक भू-माफिया राज! 16 लाख की लूट पर थानों की ‘फुटबॉल’, बीमार पीड़ितों की चीखें सुन थर्रा उठेगा सिस्टम—आखिर कब जागेगी खाकी? देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक ऐसा महा-घोटाला और सिस्टम की लाचारी का जिन्न बाहर आया है, जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे! एक तरफ सरकार के महकमों में ‘जीरो टॉलरेंस’ के बड़े-बड़े दावे और ढिंढोरे पीटे जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ज़मीन के नाम पर खून-पसीना निचोड़ने वाला भू-माफिया सिंडिकेट खुलेआम तांडव मचा रहा है।यह सिर्फ एक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है जो जनता की गाढ़ी कमाई बचाने की कसम खाकर बैठी है! क्या है इस सनसनीखेज महा-घोटाले की खौफनाक दास्तान? 16 लाख की खुली लूट और फर्जीवाड़ा: पीड़ित प्रार्थियों—अमित रावत और जेपी सजवान—से कुल ₹24,20,000/- के भूमि सौदे के नाम पर ₹16,00,000/- (सोलह लाख रुपये) की भारी-भरकम रकम बेरहमी से ऐंठ ली गई। लेकिन मजाल है कि एक इंच जमीन की भी रजिस्ट्री हुई हो! खाते में ट्रांसफर हुए सबूत: घोटाले का इससे बड़ा सुबूत और क्या होगा? पीड़ितों के पास बैंक की वे पुख्ता रसीदें और दस्तावेज मौजूद हैं, जो यह चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं कि अमित रावत ने यह रकम सीधे आरोपी कुंती देवी की पुत्री तनु रावत के बैंक खाते में ट्रांसफर की थी! असली मालिक कोई और, फर्जी मालिकाना हक का खेल: जब कागजों की परते उघड़ीं, तो पता चला कि राजस्व अभिलेखों (खेत/खतौनी) के मुताबिक उस जमीन के असली मालिक कोई और (देवेंद्र और विजेंद्र) हैं। और इधर कुंती देवी ने खुद को मालकिन बताकर भोले-भाले लोगों को चूना लगा दिया! थानों की ‘फुटबॉल’ और सिस्टम की बेबसी पर सबसे बड़ा सवाल!जब पीड़ित अपनी बीमारी और शारीरिक तकलीफों को दरकिनार कर न्याय की आस में थाने की चौखट पर पहुँचे, तो पुलिस ने जो तमाशा दिखाया, वह इंसानियत को शर्मसार करने वाला है।रायपुर थाना कहता है— “यह हमारे क्षेत्र का मामला नहीं, नेहरू कॉलोनी जाओ!” और जब पीड़ित नेहरू कॉलोनी थाना पहुँचते हैं, तो वहाँ की खाकी पल्ला झाड़ते हुए कहती है— “नहीं-नहीं, यह तो रायपुर थाने के अधिकार क्षेत्र में आता है!” वाह रे खाकी! अपराधी मजे से घूम रहे हैं, और एक बीमार इंसान न्याय के लिए इन थानों की चौखटों के चक्कर काटते-काटते दम तोड़ने की कगार पर है। क्या थानों की यह ‘फुटबॉल’ इसलिए खेली जा रही है ताकि भू-माफियाओं को बचाया जा सके? मुख्यमंत्री दरबार से लेकर डीजीपी-एसएसपी तक गुहार, पर नतीजा शून्य! पीड़ितों ने हार न मानते हुए देहरादून में माननीय मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक (DGP) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के दरबार में गुहार लगाई, प्रार्थना पत्र दिए। फाइलें ऊपर से नीचे तक घूमीं, लेकिन आज तक एक अदद FIR तक दर्ज नहीं की गई! आखिर किसके संरक्षण में पल रहे हैं ये शातिर भू-माफिया?सवाल बड़ा है— क्या देवभूमि में अब अपराधियों का राज चलेगा और सिस्टम सिर्फ तमाशा देखेगा? जनता सब देख रही है, और इस व्यवस्था की पोल खुल चुकी है! विशेष नोट: यह खबर माननीय मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक (DGP) उत्तराखंड, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) देहरादून को सौंपे गए प्रार्थना पत्रों, पीड़ित पक्षों (अमित रावत और जेपी सजवान) के बयानों और बैंक रसीदों जैसे अकाट्य दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई है। इस प्रकरण में यदि आरोपी पक्ष (प्रतिपक्षी) भी अपना कोई पक्ष रखना चाहता है, तो उनका स्वागत है; उनका वर्जन मिलते ही उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। Special Note: This report has been prepared based on the petitions submitted to the Hon’ble Chief Minister, Director General of Police (DGP) Uttarakhand, and Senior Superintendent of Police (SSP) Dehradun, along with the statements of the victims (Amit Rawat and J.P. Sajwan) and irrefutable documents such as bank receipts. If the accused party (opposing side) wishes to present their version, they are welcome to do so; as soon as their statement is received, it will also be published prominently.— M24LIVE Post navigation उत्तराखंड की राजनीति में अभी से गर्माहट! 2027 के रण में मसूरी सीट से गामा जी के ताल ठोकने की चर्चा, क्या कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के सामने खड़े होंगे अपने ही? संसद परिसर में अनोखा प्रदर्शन: विपक्ष ने ‘बंदर’ के साथ बोला सरकार पर हमला!