नई दिल्ली:भारतीय राजनीति में आज एक ऐसा भूकंप आया है जिसने आम आदमी पार्टी (AAP) की बुनियाद हिला कर रख दी है। राज्यसभा में ‘आप’ के कद्दावर नेता माने जाने वाले राघव चड्ढा ने एक बड़ा उलटफेर करते हुए भाजपा का दामन थाम लिया है। लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं है, राघव चड्ढा अकेले नहीं गए हैं, बल्कि अपने साथ सांसदों की पूरी फौज ले गए हैं।सिर्फ 3 वफादार बचे, 7 ने छोड़ा साथसदन में ‘आप’ की ताकत अब पूरी तरह बिखर चुकी है। 10 राज्यसभा सांसदों वाली पार्टी के पास अब केवल 3 सांसद ही शेष रह गए हैं: संजय सिंहएनडी गुप्ताबलबीर सिंह सींचेवाल बाकी के 7 सांसदों ने राघव चड्ढा के नेतृत्व में कमल का फूल थाम लिया है। चूँकि यह संख्या कुल सांसदों का दो-तिहाई (2/3) है, इसलिए तकनीकी रूप से इन पर दल-बदल कानून की तलवार भी नहीं लटकेगी। केजरीवाल को लगा ‘440 वोल्ट’ का करंटपार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है। एक तरफ पार्टी कानूनी लड़ाइयों में उलझी है, वहीं दूसरी तरफ भरोसेमंद साथियों का इस तरह साथ छोड़ना ‘आप’ के भविष्य पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। साख बचाने की चुनौतीअब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या संजय सिंह और बाकी बचे दो सांसद मिलकर पार्टी की साख बचा पाएंगे? या फिर यह ‘आप’ के राज्यसभा में अस्तित्व के खत्म होने की शुरुआत है? Post navigation पीएम मोदी का बंगाल दौरा: हुगली नदी में नाव सफारी और फोटोग्राफी के साथ बिताया वक्त सियासत में सबसे बड़ा धमाका: राघव चड्ढा ने छोड़ी ‘झाड़ू’, 7 सांसदों के साथ बीजेपी में शामिल!